नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति इस समय ऐसे काम कर रहे हैं जो उनके ही देश के लोगों को पसंद नहीं आ रहे। पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्होंने मागा का नारा दिया था। उन्होंने कहा था कि बाइडेन प्रशासन ने अमेरिका को ‘गर्त’ में धकेल दिया है। वह (ट्रंप) चुनाव जीतने के बाद अमेरिका को फिर से महान बनाएंगे। ट्रंप चुनाव जीत गए। लेकिन अमेरिका को महान बनाने के चक्कर में उसे ‘बर्बाद’ करने पर तुले हैं। पहले टैरिफ और अब एच्-1बी वीजा की फीस बढ़ाने के बाद वह अपने ही लोगों के निशाने पर आ गए हैं। अमेरिका इस समय भारी कर्ज के तले दबा है। जानकारों के अनुसार अमेरिका को अगले साल अकेले 12 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज चुकाना होगा या उसे फिर से जारी करना होगा। इसमें लगभग 9 ट्रिलियन डॉलर परिपक्व हो रहे कर्ज हैं और 2 ट्रिलियन डॉलर नए कर्ज हैं जो घाटे को पूरा करने के लिए जारी किए जाएंगे। इसके अलावा 1 ट्रिलियन डॉलर सिर्फ ब्याज चुकाने में जाएंगे, जो बजट घाटे का आधा है। अमेरिका का डेट-टू-जीडीपी रेशियो 125% है। यह भारत के 56.10% के मुकाबले बहुत ज्यादा है। इसका मतलब है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर उसकी वार्षिक जीडीपी की तुलना में काफी ज्यादा कर्ज है। वहीं, भारत का कर्ज प्रबंधन बेहतर स्थिति में दिखता है। अमेरिका का कुल कर्ज भी भारत के मुकाबले बहुत ज्यादा है।
previous post
